Share the Post

देहरादून/अंजना कुमारी : कहते हैं मां के दर्शन का सौभाग्य केवल उन्ही को मिलता है जिन्हे मां का बुलावा आता है। और जिन्हे माँ का निमंत्रण मिले वो भाग्यशाली कहलाता है। माँ के 51 शक्तिपीठ भारत के अलग अलग राज्यों मैं मौजूद है, जिसमे माँ वैष्णों देवी की महिमा सबसे ज़्यादा निराली हैं। तभी तो पूरे साल माँ का दरबार भक्तों से भरा रहता है। हर समय माँ के श्रद्धालु का यहाँ जमावड़ा लगा रहता हैं । ना सर्दी का खौफ, ना भीषण गर्मी की परवाह, ना बरसात का डर। हर मौसम में माँ के दर्शनों के लिए यहां भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है। नवरात्र का पावन पर्व शुरू हो चूका है। ऐसे मैं भारी श्रद्धालु माँ के दर्शन करने में माँ के दरबार में आरहें हैं ।

बता दें कि मां वैष्णो देवी को साक्षात दुर्गा स्वरूप माना जता है। मां त्रिकूट पर्वत पर पिंडी के रूप मे विराजमान रहती हैं। नवरात्र के इन नौ दिनों में माँ देवी दुर्गा के 9 रूपों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं । माँ वैष्णो देवी की कहानी एक प्राचीन कहानी है, जो माँ दुर्गा के एक रूप में माँ वैष्णो देवी की महिमा को दर्शाती है।

साथ ही कहानी के अनुसार, प्राचीन समय में रत्नाकर सागर के घर एक कन्या का जन्म हुआ, जिनका नाम वैष्णवी रखा गया। यह कन्या भगवान विष्णु की भक्त थी और नारायण की तपस्या करती थी। माँ दुर्गा का रूप लेकर वैष्णवी ने पृथ्वी पर जन्म लेकर लोगों की सेवा और भक्ति के लिए अपना जीवन अर्पित किया। नवरात्रि के अवसर पर माँ वैष्णो देवी की पूजा और दर्शन का विशेष महत्व है क्योंकि यह समय मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का होता है। माँ वैष्णो देवी को शक्ति का अवतार माना जाता है, और लोग इन नौ दिनों में उनके चरण स्पर्श करने के लिए वैष्णो देवी यात्रा पर जाते हैं। यात्रा का रास्ता कठिन होता है, लेकिन भक्तों के मन में विश्वास होता है कि माँ उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगी।

माँ वैष्णो देवी के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। नवरात्रि के पहले तीन दिनों में ही एक लाख से ज़्यादा श्रद्धालु माँ वैष्णो देवी के दर्शन किये हैं। इसके बाद भी यह सिलसिला जारी हैं l

वैष्णो देवी की यात्रा से जुड़ी कुछ और बातें :-

*वैष्णो देवी मंदिर समुद्र तल से 5,300 फ़ुट की ऊंचाई पर है।
*कटरा से मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 13 किलोमीटर की चढ़ाई करनी होती है।
*वैष्णो देवी की यात्रा पैदल, पिट्ठू, पालकी, या घोड़े से की जा सकती है।
*हेलीकॉप्टर की सुविधा भी उपलब्ध है।
*चढ़ाई से पहले पंजीकरण कराना ज़रूरी है।
*माँ वैष्णो देवी के धाम में ठहरने के लिए, लॉज बुक कराए जा  सकते हैं।

ऐसे में हमें अपने जीवन एक बार तो मां वैष्णवी के दर्शन जरूर करने ही चाहिए, माँ आप सब का कल्याण करें ऐसी हमारी कामना हैं।

By admin

error: Content is protected !!